इक बार पहले भी मुझे धोका बहर ये दे चुके की दोस्ती भी दिल की अपनी दोस्तों मौसम से है // वो जो कभी न कर सका , वो आज लिख चला हूँ मैं की आज वो इज़हार लिखना ,लिखने की कसम पे है // ख़मोश लफ्जों से मुझे कुछ कुछ बुदबुदाना याद है किसी [...]
Archive for the ‘Poems’ Category
इज़हार
Posted in Poems, tagged इज़हार, ग़ज़ल, मौसम, hindi kavita, hindi blog, parashar, praveen, praveenparasharblog on December 11, 2009 | Leave a Comment »
दिल मेरा मुझपे आ रहा है
Posted in Poems, tagged दिल मेरा मुझपे आ रहा है, शाम, blogs hindi blog, dil, hindi poems, parashar, poem hindi, praveen, praveen parashar blog on December 11, 2009 | Leave a Comment »
क्या समां छा रहा है की दिल मेरा मुझपे आ रहा है | क्या बात हुई की ख़ुद ही मैं गुनगुना रहा है || आइना मुझसे मेरी पूरानी सी सूरत मांगता है / जवान जिंदादिल मुझसे मेरी पुरनी मूरत मांगता है // अपने आँचल से उजाला ढक लेती है, चांदनी रात | कि कपड़े बदलने [...]
Aakanksha,आकांक्षा
Posted in Poems, tagged आकांक्षा, hindi kavita, hindi poem aakanksha, praveen parashar akanksha on May 28, 2009 | 10 Comments »
मन के किसी कोने मैं ,पलकों पे रहती है , पर मुश्किल से होटों पे आती है .आकांक्षा कभी झूटी सी कभी अधूरी होती है , जब भी सच्ची ,पूरी होती है आकांक्षा कभी निर्मल , छलि कभी ,कोमल कभी , भोली कभी होती है आकांक्षा कभी स्वार्थ है ,कभी है इच्छा ,कभी विव्बस्ता , [...]
वही पुरनी बात चली wahi purani baat chali
Posted in Poems, Uncategorized, tagged वही पुरनी बात चली, hindi poem praveen parashar, wahi purani baat chali on May 28, 2009 | Leave a Comment »
ढली शुहानी शाम कहीं तो वही पुरनी बात चली || थी दूर गगन के आंचल मैं वो चाँद रात के साथ पली || सुबह ओस की बूंदों के संग मुझे कली के पास मिली || ले हाथों मैं हाथ मेरा वो कुछ पल मेरे साथ चली || फ़िर गुमसुम -गुमसुम ,गुपचुप -गुपचुप खामोशी से बात [...]
मन की बात ,man ki baat
Posted in Poems, tagged मन की बात, hindi kavita man ki baat, man ki baat praveen parashar, poem hindi poems on May 28, 2009 | Leave a Comment »
चुप रहें होंट ,कोई आह न निकले ,न कागज़ पे किसी स्याही से लिखा जाए जो हर साँस कहती है, वो मन की बात || कैसे मुस्कुराते है गम ,कोई चीज़ जो छुप नही सकती चेहरे की शिकन कहती है ,वो मन की बात || हुआ खाली मेरा समंदर ,अब आँसू नही निकलते , बस [...]
“दो पल “
Posted in Poems, tagged "दो पल " hindi kavita do pal, दो पल " hindi kavita do pa, hindi poems, poem, praveen parashar poems on May 28, 2009 | 1 Comment »
आती साँसों मैं एक जाती सासों मैं एक पल दो पल बीत रहे हैं आज ,जो बीत गए थे कल| बीते पल की बात नही होती ,होती दो पल की यादें हैं | खो जाता हैं वो पल भी जिसमें न खोने की कसमें खाते हैं || दो पल कसे अलबेले जो अब तक भूल [...]
November Rain
Posted in Poems on October 16, 2008 | Leave a Comment »
When I look into your eyes I can see a love restrained But darlin’ when I hold you Don’t you know I feel the same ‘Cause nothin’ lasts forever And we both know hearts can change And it’s hard to hold a candle In the cold November rain We’ve been through this such a long [...]